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कबीरधाम की खबर : अभिजीत मुहूर्त में हुआ प्रभु श्रीराम का जन्म, जश्न में डूबे कवर्धावासी, भगवामय हुआ पूरा शहर …

कबीरधाम। अभिजीत मुहूर्त में ठीक दोपहर 12 बजकर 5 मिनट में प्रभु श्री राम का जन्म हुआ। रविवार सुबह से प्रभु श्री राम के आगमन को लेकर कबीरधाम में जश्न मनाया जा रहा हैं। वही, जन्मोत्सव के बाद श्री राम मंदिर सहित पूरे कवर्धा में खुशियां मनाई जा रही है। रंग गुलाल, पुष्प व आतिशबाजी कर लोग एक दूसरे को बधाई और शुभकामना दे रहे हैं।

जन्म के बाद किया गया विशेष वस्त्रों और आभूषणों का श्रृंगार –

बता दे कि श्रीराम जानकी मंदिर प्रमुख पुजारी पंडित अखिलेश शुक्ला व ब्रम्हचारी केशवानन्द जी और अनुराग शुक्ला महाराज ने प्रभु के जन्म पश्चात पंचामृत से स्नान कराया और विशेष वस्त्रों व आभूषणों का श्रृंगार किया। वही, देखने से यह प्रतीत हो रहा है मानो भगवान श्रीराम साक्षात प्रगट हो गए हो।

वही, सुबह से मंदिर में भजन कीर्तन की शुरुआत हो गई। साथ ही लोगों की भीड़ काफी ज्यादा है। कोलकाता से आए विशेष कारीगर ने सुगंधित फूलों से पूरे मंदिर को सजाया है, जिसका आकर्षण देखते ही बनता हैं। सभी भक्त मिलकर रामलला का जन्म उत्सव मना रहे हैं। कवर्धा में जय श्रीराम के नारे लग रहे हैं।

अभिजीत मुहूर्त में हुआ था श्रीराम का जन्म –

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि श्रीराम का जन्म दोपहर के 12.05 बजे हुआ था। उस समय भगवान का प्रिय अभिजीत् मुहूर्त था। तब न बहुत सर्दी थी, न धूप थी। महर्षि वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, ब्रहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8, 9)। श्री राम का जन्म भारतवर्ष में सरयू नदी के पास स्थित अयोध्या नगरी में एक महल में हुआ था।

हर तरफ लहरा रहा भगवा ध्वज –

अयोध्या को सप्त पुरियों में प्रथम माना गया है। वह पवित्र समय सब लोकों को शांति देने वाला था। जन्म होते ही जड़ और चेतन सब हर्ष से भर गए। शीतल, मंद और सुगंधित पवन बह रहा था। देवता हर्षित थे और संतों के मन में चाव था। वन फूले हुए थे, पर्वतों के समूह मणियों से जगमगा रहे थे और सारी नदियां अमृत की धारा बहा रही थीं। यही वजह है कि कबीरधाम में भी चारों तरफ भगवा ध्वज लहराने लगा है।

जन्म के बाद भगवान श्रीराम की महाआरती –

वही प्रभु श्रीराम के अवतरण के बाद श्री शंकराचार्य जनकल्याण न्यास के मुख्य ट्रस्टी चंद्रप्रकाश उपाध्याय ने भव्य महा-आरती किया, जिसमें मंदिर समिति के रमेश पांडेय, महेश पांडेय, राम कृपेश्वर उपाध्याय, धनराज उपाध्याय, वेद श्रीवास्तव, प्रकाश केशरवानी, संतोष चौबे, आनंद उपाध्याय सहित कवर्धा शहर के हज़ारों श्रद्धालुओं ने महाआरती में शामिल होकर प्रभु श्रीराम का आरती कर अपने जीवन को कृतार्थ किया।

भगवान राम को लगाया गया विशेष भोग –

भगवान श्री राम को पंजरी व मालपुआ का विशेष भोग, 56 भोग लगाया गया हैं। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को मालपुआ और पंजरी का प्रसाद वितरण किया जा रहा हैं। रामलला के दर्शन के भक्त लगातार मंदिर में आ रहे हैं और प्रसाद पाकर खुद को तृप्त महसूस कर रहे हैं।

Ashok Kumar Sahu

Editor, cgnewstime.com

Ashok Kumar Sahu

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