धान खरीदी में लौटी रफ्तार: 18 दिन बाद सोसाइटी कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल

छत्तीसगढ़ में सोसाइटी प्रबंधकों, धान खरीदी प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की 3 नवंबर से जारी हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है। राज्यभर में विभिन्न जिला इकाइयों ने अलग-अलग स्तर पर हड़ताल समाप्त करने का ऐलान कर दिया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे, उन पर सरकार से किसी भी प्रकार की सहमति नहीं बन पाई, यानी कोई मांग पूरी नहीं हुई है। इसके बावजूद हड़तालियों को स्थानीय प्रशासन और सरकारी दबाव के कारण पीछे हटना पड़ा।
सोमवार से धान खरीदी और राशन वितरण फिर पटरी पर
हड़ताल के दौरान सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए कृषि, राजस्व और अन्य विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को धान खरीदी की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब, हड़ताल समाप्त होते ही सोमवार से सोसाइटी कर्मचारी फिर धान खरीदी के काम में जुट जाएंगे।
इसके साथ ही चार हजार से अधिक सोसाइटियों द्वारा संचालित पीडीएस दुकानों में राशन वितरण की समस्या भी दूर हो गई है। 20 नवंबर तक हजारों दुकानों में राशन अटका हुआ था। विभाग ने साफ किया है कि शनिवार और रविवार से ही राशन वितरण फिर शुरू कर दिया जाएगा।
हड़ताल क्यों हुई? ये थीं प्रमुख मांगें
सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल की थी। मुख्य मांगें इस प्रकार थीं—
धान परिवहन के बाद वर्ष 2023-24 और 2024-25 की संपूर्ण सुखत राशि देने की मांग।
धान खरीदी 2024-25 में शून्य शॉर्टेज प्रोत्साहन लागू करने और विभिन्न कमीशन व सुरक्षा व्यय में वृद्धि।
मध्यप्रदेश की तरह उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं को ₹3000 मासिक भुगतान।
कलेक्टर द्वारा नामित धान खरीदी अधिकारियों को परिवहन और सुखत मिलान की संपूर्ण जिम्मेदारी लिखित में देने की मांग।
कंप्यूटर ऑपरेटरों की आउटसोर्सिंग प्रक्रिया समाप्त कर नियमितिकरण।
प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों को कर्मचारियों के वेतनमान के लिए प्रति वर्ष ₹3 लाख प्रबंधकीय अनुदान देने की मांग।
काण्डे कमेटी की सिफारिशें लागू कर PF, DA, ESIC और संविदा/दैनिक कर्मचारियों को भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग।
बैंक कैडर के रिक्त पदों पर समिति कर्मचारियों के लिए 50% विभागीय भर्ती और आयु व योग्यता में छूट।
अब आगे क्या?
हालांकि कर्मचारी बिना मांगें पूरी हुए काम पर लौट रहे हैं, लेकिन कई जिलों के संगठनों ने कहा है कि वे आगे भी सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे। फिलहाल, राज्य की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया—धान खरीदी और राशन वितरण—अब फिर से सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।



