चक्रधर समारोह के छठे दिन शास्त्रीय कला की अनुपम छटा, देशभर के कलाकारों ने बांधा समां

रायगढ़ — अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह 2025 के 40वें वर्ष के छठे दिन मंच पर शास्त्रीय संगीत और नृत्य की अनुपम प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रायगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से सजी इस शाम ने परंपरा और आधुनिकता के अद्भुत संगम को जीवंत कर दिया।
बाल कलाकार पार्थ यादव की तबला प्रस्तुति ने जीता दिल
कार्यक्रम की शुरुआत रायगढ़ और आसपास के उभरते कलाकारों की प्रस्तुतियों से हुई। कोरबा के बाल कलाकार मास्टर पार्थ यादव ने जब तबले की थाप छेड़ी, तो श्रोताओं ने दंग रहकर उनकी साधना और सुर-लय की परिपक्वता को महसूस किया। पार्थ ने कम उम्र में ही तबला वादन में जो निपुणता दिखाई, वह उनके गुरुओं श्री मोरध्वज वैष्णव और श्री नवीन महंत के प्रशिक्षण और उनके निरंतर अभ्यास का प्रमाण था। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
रायगढ़ की बेटियों की अद्भुत कथक और ओडि़शी प्रस्तुति
ऋत्वी अग्रवाल और सौम्या शर्मा ने कथक की लय और भाव-भंगिमा से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं रायगढ़ की ही हीना दास ने अपनी ओडि़शी नृत्य की प्रस्तुति में शास्त्रीय गरिमा और नृत्य की सौम्यता का अद्भुत प्रदर्शन किया।
बरगढ़ की मुक्ता मेहर और बिलासपुर के भूपेंद्र बरेठ एवं उनकी टीम ने कथक में नृत्य की सूक्ष्मता और ऊर्जा का ऐसा संगम प्रस्तुत किया कि दर्शक देर तक तालियों से उनका उत्साहवर्धन करते रहे।
राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने बढ़ाया समारोह का गौरव
छठे दिन की शाम को राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। दिल्ली की नृत्यांगना आरोही मुंशी ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति से दर्शकों को दक्षिण भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपरा से रूबरू कराया।
मुंबई की पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिडे देशपांडे ने अपने मधुर हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को सुरों के रस में डुबो दिया। उनकी आवाज की गहराई और रागों की प्रस्तुति देर रात तक दर्शकों के मन में गूंजती रही।



