CG Naxal Surrender: बस्तर में माओवादियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, 200 से अधिक नक्सली छोड़ेंगे हिंसा का रास्ता

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता सामने आई है। शुक्रवार सुबह जगदलपुर में 200 से अधिक नक्सली मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। यह घटना देश के नक्सल इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जब इतने बड़े स्तर पर माओवादी एक साथ मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं।
लगातार मिल रही सफलता से कमजोर पड़ा नक्सल नेटवर्क
हाल के महीनों में पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार सफल कार्रवाई के चलते नक्सली संगठन भीतर से टूटने लगे हैं। न केवल बस्तर, बल्कि तेलंगाना और महाराष्ट्र के क्षेत्रों में भी आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति देखी जा रही है। कांकेर और बीजापुर के माड़ डिवीजन से करीब 200 माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, जिनमें से कई अपने हथियार भी जमा कर रहे हैं।
सीनियर नक्सली नेता भी आत्मसमर्पण की कतार में
सरेंडर करने वालों में केंद्रीय कमेटी के सदस्य रूपेश उर्फ आसन्ना, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य भास्कर और राजू सलाम जैसे प्रभावशाली नक्सली शामिल हैं। इसके अलावा संगठन की प्रवक्ता रानीता भी आत्मसमर्पण करेंगी। माड़ डिवीजन के 158 नक्सलियों में से 70 ने हथियार समेत सरेंडर की स्वीकृति दी है, वहीं कांकेर के 39 नक्सली भी हथियार सौंपने को तैयार हैं।
भारी मात्रा में हथियारों का आत्मसमर्पण
इन नक्सलियों से पुलिस को एके-47, इंसास राइफल, ऑटोमेटिक हथियार, देसी बंदूकें और अन्य असलहों की बड़ी खेप मिल रही है। खास बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में बड़ी संख्या में महिला नक्सली भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र में भी माओवादी नेतृत्व का पतन
कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र में पोलित ब्यूरो सदस्य वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा ने अपने 60 साथियों के साथ मुख्यमंत्री के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी भी अब हथियार छोड़ रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि बस्तर अब नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
समारोह में मौजूद रहेंगे राज्य के शीर्ष नेता
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, डीजीपी अरुण देव गौतम, बस्तर आईजी, सीआरपीएफ डीआईजी और अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। गुरुवार रात को ही सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जगदलपुर लाया जा चुका है, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से मीडिया से फिलहाल दूर रखा गया है।
दो दिनों में कुल 258 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो दिनों में कुल 258 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो यह दर्शाता है कि अब विश्वास की ताकत बंदूक से बड़ी बन चुकी है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ रहा है। पिछले 22 महीनों में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने सरेंडर किया और 1785 गिरफ्तार हुए।
बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने का मिशन
सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बना दिया जाए। इस दिशा में अब तक 64 सुरक्षा शिविर खोले जा चुके हैं, जिनसे न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि विकास और सरकारी योजनाएं भी गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर पहले ही नक्सलियों से मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में निर्णायक लड़ाई जारी है।
योजनाओं से बढ़ा भरोसा
सरकार की पुनर्वास नीति 2025 और “नियद नेल्ला नार” योजना ने नक्सल प्रभावित इलाकों में संवाद, सुरक्षा और विकास का माहौल बनाया है। इन्हीं प्रयासों से माओवादी हिंसा का अंत संभव हो रहा है।



