न्याय दिलाने वाले अफसर थाने के सामने अनशन पर बैठे: दीपका नायब तहसीलदार भगत ने बेटे के लिए की FIR की मांग, 48 घंटे बाद हरकत में आई पुलिस

@सुशील तिवारी
छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब दीपका तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार बंदे राम भगत अपने बेटे के साथ हुई मारपीट के मामले में न्याय की मांग को लेकर सिटी कोतवाली थाने के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए। विडंबना यह रही कि जो अधिकारी रोज़ आम लोगों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाते हैं, उन्हें अपने ही बेटे के लिए पुलिस की चौखट पर बैठना पड़ा।

कलेक्टर के गनमैन पर मारपीट का आरोप
मामला 20 जनवरी का है। आरोप है कि सारंगढ़–बिलाईगढ़ कलेक्टर के गनमैन हरिशचंद्र गुमान ने भारत माता चौक पर नायब तहसीलदार के पुत्र राहुल भगत के साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की। मारपीट इतनी गंभीर थी कि राहुल के कान का पर्दा फट गया। घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई, लेकिन 48 घंटे तक FIR दर्ज नहीं की गई।
फोन करते रहे अफसर, जवाब नहीं मिला
नायब तहसीलदार भगत का आरोप है कि वे गुरुवार दोपहर से थाने में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने थाना प्रभारी को 8–10 बार फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। जब संपर्क हुआ भी तो केवल टालमटोल भरे जवाब दिए गए। न जांच अधिकारी और न ही अन्य पुलिसकर्मी कोई स्पष्ट स्थिति बताने में सक्षम रहे।
FIR तक अन्न-जल त्याग का ऐलान
पुलिस की उदासीन कार्यप्रणाली से आहत होकर नायब तहसीलदार ने साफ कह दिया कि जब तक FIR की प्रति नहीं मिलेगी, वे अन्न और जल ग्रहण नहीं करेंगे। एक जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारी का इस तरह थाने के सामने बैठना पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
FIR के बाद अनशन समाप्त
अनशन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई।
दीपका तहसीलदार अमित केरकेट्टा ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने देर रात FIR दर्ज कर ली है, जिसके बाद नायब तहसीलदार बंदे राम भगत ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
सवाल अब भी कायम है कि जब एक तहसीलदार के बेटे को न्याय के लिए अनशन करना पड़े, तो आम नागरिक की सुनवाई कितनी सहज होगी?



