Naxalite surrender: टॉप नक्सली बंदी प्रकाश ने छोड़ी बंदूक, तेलंगाना पुलिस के सामने किया सरेंडर

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता बंदी प्रकाश ने आखिरकार तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। वह नक्सलियों की तेलंगाना स्टेट कमेटी और स्पेशल जोनल कमेटी का प्रभावशाली सदस्य था। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। बंदी प्रकाश का नाम लंबे समय से पुलिस और खुफिया एजेंसियों की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था।
छात्र आंदोलन से लेकर नक्सल संगठन तक की यात्रा
बंदी प्रकाश उर्फ प्रभात, अशोक, क्रांति, तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी इलाके का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोल माइंस में कार्यरत हैं। प्रकाश ने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में “गांव चलो आंदोलन” से की थी, जिसके दौरान वह रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) से जुड़ा। इसके बाद उसने सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन का नेतृत्व किया और धीरे-धीरे माओवादी पार्टी की राज्य समिति का सदस्य बन गया।
ऑपरेशन ‘कगार’ से डरे नक्सली, बढ़ रहे आत्मसमर्पण
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कगार’ का असर अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी के दबाव में बंदी प्रकाश जैसे बड़े नक्सली नेता भी आत्मसमर्पण का रास्ता चुन रहे हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस पर कहा था कि, “माओवादी अब मुख्यधारा से जुड़कर विकास में भागीदारी दिखा रहे हैं।”
45 वर्षों से नक्सली गतिविधियों में था शामिल
बंदी प्रकाश लगभग 45 सालों से नक्सली आंदोलन का हिस्सा रहा है। वह माओवादी संगठन में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र का मुख्य रणनीतिकार और विचारधारा प्रचारक माना जाता था।



