
20 अक्टूबर 2025. देशभर में आज दिवाली का पर्व बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजन करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार से दीवाली की शुरुआत
मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना की गई। रूप चौदस के दिन महाकाल का पारंपरिक केसर, चंदन और उबटन से विशेष श्रृंगार किया गया। पुजारी परिवार की महिलाओं ने इस श्रृंगार को पूरा किया।
दीवाली की शुरुआत भस्म आरती के दौरान फुलझड़ी जलाकर की गई। बाबा को नए वस्त्र पहनाए गए और अनेकों व्यंजन का भोग अर्पित किया गया। देशभर से आए भक्तों ने दीपों के इस पर्व की शुरुआत महाकाल के चरणों में की।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दीपावली सोमवार को पड़ रही है और तिथि है कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, जो दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी। उसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन शाम 5:54 बजे तक चलेगी।
लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय —
शाम 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक
प्रदोष काल: 05:46 PM से 08:18 PM तक
वृषभ काल: 07:08 PM से 09:03 PM तक
आज का पंचांग
तिथि: कृष्ण चतुर्दशी (3:44 PM तक), फिर अमावस्या
वार: सोमवार
सूर्योदय: 06:25 AM
सूर्यास्त: 05:46 PM
चंद्रोदय: 06:06 AM
चंद्रास्त: 05:01 PM
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कन्या
योग: वैधृति (2:35 AM अगली सुबह तक)
करण: शकुनी (3:44 PM तक), फिर चतुष्पाद (4:47 AM तक)
आज के शुभ-अशुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: 11:43 AM से 12:28 PM
अमृत काल: 1:40 PM से 3:26 PM
राहुकाल: 7:50 AM से 9:15 AM
गुलिक काल: 1:31 PM से 2:56 PM
यमगण्ड: 10:40 AM से 12:06 PM
दिवाली का आध्यात्मिक महत्व
दीवाली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन से अज्ञान, नकारात्मकता और अहंकार के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है। यह दिन श्रीराम जी के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में दीप जलाकर मनाया जाता है।
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर हम समृद्धि, बुद्धि और सुख की कामना करते हैं। यह पर्व प्रेम, प्रकाश और नई उम्मीदों का संदेश देता है।



