
कवर्धा। छत्तीसगढ़ में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की पदोन्नति और स्थानांतरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कवर्धा के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पत्र में उन्होंने पदोन्नति प्रक्रिया में अपने साथ भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कवर्धा एसपी का आरोप सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार प्रमोशन और ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और विशेष वर्ग के अधिकारियों के साथ भेदभाव कर रही है। बैज के अनुसार, इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं।
क्या है पूरा मामला?
कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई, जो 2012 बैच के IPS अधिकारी हैं, ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी कई पदोन्नति सूचियों में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें वरिष्ठ वेतनमान और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति नहीं दी गई। अधिकारियों द्वारा इसका कारण उनके विरुद्ध लोकायुक्त संगठन, भोपाल में लंबित जांच को बताया गया।
हालांकि, छवई ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ न तो कोई चार्जशीट जारी हुई है, न ही कोई विभागीय जांच या आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे अधिक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अन्य अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया, जबकि उनके मामले में नियमों की अनदेखी की गई।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
अपने पत्र में छवई ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि यदि कोई अधिकारी निलंबित नहीं है और उसके विरुद्ध आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है, तो उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है।





